युवा पीढ़ी को ज्योतिष की प्राचीन विद्या से जोड़ने का अभियान

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कैसी युवती से विवाह करना होता है श्रेष्ठ

Lal Hatheli

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कैसी युवती से विवाह करना होता है श्रेष्ठ

हर युवा शादी कर सुखी जीवन व्यतीत करने की इच्छा रखता है, लेकिन कई कारणों से विवाह के बाद दंपति में दूरियां बढ़ने लगती हैं, जिससे रिश्तों में तनाव आ जाता है। आगे चलकर इसका परिणाम दोनों के लिए अच्छा नहीं होता। हालांकि, थोड़ी-सी सावधानी और समझदारी से इन समस्याओं से बचा जा सकता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, विवाह के लिए ऐसी युवती को श्रेष्ठ माना जाता है जो गुण, स्वभाव और कुंडली तीनों दृष्टियों से अनुकूल हो। मान्यता है कि ऐसी कन्या घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली लाती है। कन्या की कुंडली में गुरु ग्रह का मजबूत होना वैवाहिक सुख का संकेत देता है।

यदि हम शारीरिक लक्षणों की बात करें, तो जिन महिलाओं के पैर कोमल, लालिमा युक्त और चिकने होते हैं, उन्हें शुभ माना जाता है। पैरों की उंगलियां आपस में सटी हों तो यह अच्छा संकेत होता है। कोमल हाथ, संतुलित भुजाएं, लंबी गर्दन और घने, रेशमी बाल भी सौभाग्य के प्रतीक माने जाते हैं। गोल और हल्के तांबे रंग के नाखून भी शुभ माने जाते हैं।

विवाह में लड़का और लड़की की कुंडली का मिलान भी परेशानियों से बचाने में सहायक होता है। ज्योतिष के अनुसार, 36 में से कम से कम 18 गुण मिलना आवश्यक है, जबकि 24 से अधिक गुण मिलना उत्तम माना जाता है। 
 
ज्योतिषीय दृष्टि से वृषभ, कर्क, कन्या, तुला और मीन राशि की कन्याओं को प्रेम और समर्पण के मामले में अच्छा माना जाता है।

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