जीवन में आने वाले उतार-चढ़ावों का संकेत देता है केतु पर्वत
हमारे हाथों में उभरे पर्वतों का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव, सफलता, असफलता और बाधाओं का इन पर्वतों से विशेष संबंध माना जाता है। ये पर्वत हमारे संपूर्ण व्यक्तित्व के बारे में पहले से संकेत देते हैं। ज्योतिष विद्या का सहारा लेकर हम इन परेशानियों से काफी हद तक निजात पा सकते हैं।
हस्तरेखा शास्त्र में केतु पर्वत का विशेष महत्व माना गया है। यह पर्वत हथेली में मणिबंध (कलाई) के ऊपर, शुक्र और चंद्र क्षेत्र के मध्य भाग के समीप स्थित होता है। केतु पर्वत का प्रभाव व्यक्ति के जीवन में विशेष रूप से बचपन से लेकर युवावस्था तक अधिक देखा जाता है।
यदि किसी व्यक्ति का केतु पर्वत स्वाभाविक रूप से उभरा हुआ, संतुलित और स्पष्ट हो तथा भाग्य रेखा भी मजबूत हो, तो ऐसा व्यक्ति भाग्यशाली, बुद्धिमान और जीवन में निरंतर प्रगति करने वाला होता है। कई बार ऐसे लोग साधारण या गरीब परिवार में जन्म लेकर भी अपने प्रयासों से ऊंचा स्थान प्राप्त कर लेते हैं। इनके जीवन में सुख-सुविधाएं धीरे-धीरे बढ़ती जाती हैं।
वहीं, यदि केतु पर्वत असामान्य रूप से अधिक उभरा हुआ या दबा हुआ हो तथा भाग्य रेखा कमजोर हो, तो व्यक्ति को जीवन के प्रारंभिक वर्षों में संघर्ष, आर्थिक तंगी और शिक्षा में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे लोगों का स्वास्थ्य भी बचपन में कमजोर रह सकता है।
यदि केतु पर्वत अविकसित हो, तो जीवन में स्थिरता की कमी बनी रहती है। इसलिए केतु पर्वत का संतुलित और विकसित होना व्यक्ति की उन्नति के लिए अत्यंत आवश्यक माना गया है।