उंगलियों से राजयोग की पहचान
हस्तरेखा शास्त्र में उंगलियों से भी राजयोग की पहचान की जा सकती है। अगर हथेली की चारों उंगलियां बिलकुल सीधी हैं और उनमें कोई मोड़ नहीं है तो सर्वोत्तम कहा गया है। यह एक तरह का राजयोग ही होता है। अगर कोई भी उंगली किसी दूसरी उंगली पर नहीं जाती या फिर किसी अन्य उंगली पर नहीं चढ़ती तो यह शानदार हथेली की पहचान होती है। हाथ सीधा करने पर अगर उंगलियों में किसी भी तरह का कोई गैप भी नहीं बनता तो यह शानदार कामयाबी की निशानी होती है। मान लो किसी की हथेली में मध्यमा उंगली पहली उंगली के पीछे चली जाती है तो इसे अच्छा नहीं माना गया है। पहली उंगली बृहस्पति की उंगली होती है और दूसरी यानी मध्य उंगली शनि के बारे बताती है। इसका सीधा अर्थ हुआ कि शनि बृहस्पति के पीछे चले गए हैं।
बृहस्पति को ज्ञान का कारक माना गया है और शनि को भाग्य, धन का दाता कहा गया है। ऐसे में इंसान को ज्ञान तो बहुत होगा, लेकिन वो उस ज्ञान से धन का उतना अर्जन नहीं कर पाएगा। ऐसे लोग बहुत ज्ञानी होते हुए भी धन नहीं कमा पाते। ऐसे लोग धार्मिक भी बहुत होते है और ज्ञान भी बहुत होता है। ऐसे इंसान में बहुत संतोष पाया जाता है, लेकिन ये धन कमाने में कमजोर हो जाते हैं। ऐसा भी नहीं है कि इस कारण ये दु:खी होते हैं। बिलकुल नहीं। क्योंकि ऐसे लोग बहुत संतोषी हो जाते हैं। इनके पास जो भी होता है ये उसी में बहुत खुश रहने वाले होते हैं। ऐसे लोगों की एक विशेषता यह भी होती है कि ये किसी भी मामले में किसी अन्य से कोई मुकाबला भी नहीं करते हैं। मेरा अनुभव है कि ऐसे लोगों को बुढ़ापा बहुत शानदार होता है। इनकी संतान भी बहुत नेक होती है। ये अपनी संतान को धन देने की बजाए ज्ञान और संस्कार देने में भरोसा करते हैं।